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पंचमुखी हनुमान भक्तों के लिए तारणहार, जय श्री राम

<p>हनुमान जी का एकमुखी&comma; पंचमुखी और एकादशमुखी स्वरूप सारे जगत में प्रसिद्ध है । भगवान शंकर की तरह इन्हें भी पंचमुखी कहा जाता है । इस रूप में हनुमान जी मार्गशीर्ष कृष्णाष्टमी को पुष्य नक्षत्र में सिंह लग्न तथा मंगल के दिन अवतरित हुए थे । भगवान के इस अवतार के पूजन से ऊर्जा मिलती है साथ ही इनकी आराधना से बुद्धि&comma; बल&comma; कीर्ति&comma; धीरता&comma; निर्भीकता&comma; आरोग्य&comma; वाक् शक्ति आदि गुण प्रसाद की तरह प्राप्त होते हैं ।<br &sol;>&NewLine;<img class&equals;"alignnone size-full wp-image-1976" src&equals;"http&colon;&sol;&sol;hindustancoverage&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2021&sol;03&sol;SDETRY&period;jpg" alt&equals;"" width&equals;"862" height&equals;"1200" &sol;><br &sol;>&NewLine;इनके पूर्व की ओर का मुख वानर का है जिसकी प्रभा करोड़ों सूर्यो के तुल्य है उसकी भृकुटियां चढ़ी हुई है । पूर्वी मुख वाले हनुमान का स्मरण करने से समस्त शत्रुओं का नाश हो जाता है ।<&sol;p>&NewLine;<p>इनका पश्चिम दिशा वाला मुख गरुण का प्रतीक है । जिसकी चोंच टेढ़ी और अत्यंत पुष्ट है । यह सभी नामों को परास्त करने वाला तथा विष एवं भूत-प्रेत आदि का उच्छेदक है ।<br &sol;>&NewLine;<img class&equals;"alignnone size-full wp-image-1977" src&equals;"http&colon;&sol;&sol;hindustancoverage&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2021&sol;03&sol;AWETRY&period;jpg" alt&equals;"" width&equals;"1600" height&equals;"1200" &sol;><br &sol;>&NewLine;यदि हनुमान जी के उत्तर मुख यानी शूकर की आराधना की जाए&comma; तो भक्तों के ज्वर आदि रोग दूर हो जाते हैं । यह मुख आकाश के सदृश कृष्ण वर्ण तथा पाताल चारी&comma; जीवो&comma; सिंह&comma; बेताल आदि का प्रतीक है । अगर हनुमान जी के उत्तर मुख का पूजन किया जाए&comma; तो भक्तों को संपत्ति मिलती है ।<&sol;p>&NewLine;<p>पंचमुखी हनुमान जी के दक्षिण मुखावतार भगवान नृसिंह भक्त राज प्रहलाद की रक्षा के लिए स्तंभ से प्रकट हुए थे और उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध किया था । हनुमान जी का दक्षिण दिशा की ओर का मुख नृसिंह भगवान के मुख की तरह बड़ा ही विशिष्ट है । उनके शरीर की कांति बड़ी तीक्ष्ण और भयानक होने पर भी भक्तों के जन्म-मरण आदि के भय को दूर करने वाली है ।<&sol;p>&NewLine;<p>इसी प्रकार हनुमान जी का उर्ध्वामुख हय रूप माना जाता है । इनका हय ग्रीव अवतार श्रुतियो का उद्धार करने के लिए ब्रह्मा जी की प्रार्थना पर प्रकट था । शास्त्रों में कहा जाता है कि उस दौरान प्रभु की गर्दन और मुखाकृति घोड़े जैसी थी । उन्होंने वेदों का उद्धार किया था ।<br &sol;>&NewLine;<img class&equals;"alignnone size-full wp-image-1979" src&equals;"http&colon;&sol;&sol;hindustancoverage&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2021&sol;03&sol;SDFTT&period;jpg" alt&equals;"" width&equals;"1600" height&equals;"1000" &sol;><br &sol;>&NewLine;असल में हनुमान जी के ऊपर का मुख&comma; अश्वनी कुमार देवों तथा भगवान हय ग्रीव के जैसा घोड़े की आकृति वाला भयंकर तथा दानवो का नाश करने वाला है । ऐसा माना जाता है कि इसी अश्वमुख वाले हनुमान ने भयंकर युद्ध में तारकासुर नाम के राक्षस का संहार किया था।<&sol;p>&NewLine;

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